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सत्संग और सदाचार से बदलता है जीवन का मार्ग : स्वामी राघवाचार्य मनुष्य के जीवन में भक्ति, ज्ञान व वैराग्य का संचार करती है कथा, प्रेतयोनि में भटक रहे धुंधकारी का हुआ उद्धार
- दैनिक लोक भारती
- 19 Jul, 2026
धार्मिक ग्रंथ नहीं, अपितु भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात वाङ्मय स्वरूप है श्रीमद् भागवत
राजापाकड़ कुशीनगर। जनपद के तमकुहीराज विकासखंड के चन्द्रौटा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के प्रथम दिन शनिवार की सायं जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भागवत माहात्म्य एवं गोकर्ण-धुंधकारी की प्रेरणादायी कथा का रसपान कराया।
आचार्य ने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात वाङ्मय स्वरूप है। कलियुग में श्रद्धा और भक्ति के साथ भागवत का श्रवण, मनन एवं कीर्तन मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाता है। गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि दुष्कर्मों के कारण प्रेतयोनि को प्राप्त धुंधकारी का भी सात दिवसीय श्रीमद्भागवत श्रवण से उद्धार हो गया।
सत्संग, सदाचार और भगवान की कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण पतित व्यक्ति के जीवन में भी परिवर्तन ला सकता है। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर भक्ति, धर्माचरण और लोककल्याण है। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पंडाल का वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष के बीच कथा का श्रवण किया।
आयोजक डॉ. वेद प्रकाश मिश्र ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार, युवाओं को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा से जोड़ना तथा नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सपरिवार कथा में पहुंचने की अपील की।
मुख्य यजमान सुधाकर मिश्र एवं डॉ. संध्या मिश्र के अलावा अखिलेश मणि त्रिपाठी, दुर्गाशंकर मणि, शिवजीपति तिवारी, अमितपति तिवारी, प्रमोद प्रसाद, नीरज सैनी, रजनीकांत मिश्र, रत्नेश मिश्र, महेश मिश्र, बाल मुकुंद मिश्र, शशिकांत तिवारी, राजन तिवारी सेवक पंकज मिश्रा कालीचरण मिश्रा डॉ रामेश्वर मिश्र सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
कथा 24 जुलाई तक प्रतिदिन अपराह्न तीन से शाम सात बजे तक चलेगी। समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में आयोजन डॉक्टर वेद प्रकाश मिश्रा ने सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट किया।
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